हाथ की रेखाओ से जाने आपका वैवाहिक जीवन कैसा होगा


hath ki rekha se jane apke vaivahik jivan ke bare me

जिस प्रकार जन्म कुण्डली में विवाह का समय, वैवाहिक जीवन, स्वास्थ्य आदि का ज्ञान विवाह स्थान से ज्ञात होता है, उसी प्रकार हस्त रेखा में विवाह रेखा स्पष्ट करती है।

  • विवाह रेखा सूर्य रेखा का स्पर्श कर अधोगमन करे, तो प्राणी का विवाह अनमेल होता है। यदि विवाह रेखा मस्तिष्क रेखा का स्पर्श करे तो वह व्यक्ति अपनी पत्नी का हत्यारा होता है। बुध पर्वत पर विवाह रेखा कई खण्डों में विभक्त हो जाए, तो बार-बार सगाई टूट जाती है।
  • विवाह रेखा पर काला धब्बा होने पर प्राणी को पत्नी से सुख नहीं प्राप्त होता है। यदि विवाह रेखा ऊर्ध्वगमन करते हुए कनिष्ठा अंगुली के द्वितीय पर्व पर चढ़ जाए तो वह व्यक्ति आजीवन कुंवारा रहता है।
  • विवाह रेखा बीच-बीच में पतली होकर पुन: चौड़ी होती हुई दिखाई, तो जीवनसाथी के अस्वास्थ्य को प्रकट करती है। ऐसे व्यक्ति की पत्नी निरंतर रुग्ण रहती है, जिसके कारण दांपत्य सुख की हानि होती है।

Jivan ka darpan

  • हस्त रेखाएं हमारे जीवन का दर्पण है। शास्त्रकारों ने इस विषय पर पर्याप्त अध्ययन कर मनुष्य को संपूर्ण शुभाशुभ फलों का निष्कर्ष प्राप्त करने में सफलता अर्जित की है। यह एक मौलिक सिद्धांत है। इसका अपवाद नहीं किया जा सकता है।
  • मानव जीवन का चालीस प्रतिशत भाग दाम्पत्य जीवन पर आधारित है। अत: इस विषय को ठीक से ज्ञात कर लेने पर हम जीवन में सुख-शांति का आकलन कर सकते हैं।
  • धमार्थकाम के अंतर्गत परिणय रेखा धर्म और अर्थ के मूल में अवस्थित देखी जाती है। इसी से हम व्यावहारिक जीवन की सफलता का निर्धारण में सभी एक मत हैं। पुराण, जैन मुनि तथा आधुनिक पाश्चात्य मूल तथा हृदय रेखा का उद्गम स्थल कनिष्ठिका मूल तथा हृदय रेखा के मध्य ही स्वीकार करते हैं।

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